बालकांड दोहा 315
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चौपाई :जिन्ह कर नामु लेत जग माहीं। सकल अमंगल मूल नसाहीं॥करतल होहिं पदारथ चारी। तेइ सिय रामु कहेउ कामारी॥1॥ भावार्थ:- जिनका नाम लेते ही जगत में सारे अमंगलों की जड़ कट जाती है और चारों पदार्थ (अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष) मुट्ठी में आ जाते ह