Home / Articles / Page / 1

अध्याय 1 श्लोक 1 - 4 - Bhagavad Gita In Hindi

Filed under: Bhagvad Gita
 अध्याय 1 श्लोक 4इस सेना में भीम तथा अर्जुन के समान युद्ध करने वाले अनेक वीर धनुर्धर हैं - यथा महारथी युयुधान, विराट तथा द्रुपद । अध्याय 1: कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में सैन्यनिरीक्षण श्लोक 1 . 4अत्र श्रूरा महेष्वासा भीमार्जुनसम�

अध्याय 1 श्लोक 1 - 3 - Bhagavad Gita In Hindi

Filed under: Bhagvad Gita
अध्याय 1 श्लोक 1 - 3 - Bhagavad Gita In Hindiहे आचार्य! पाण्डुपुत्रों की विशाल सेना को देखें, जिसे आपके बुद्धिमान् शिष्य द्रुपद के पुत्र ने इतने कौशल से व्यवस्थित किया है । अध्याय 1: कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में सैन्यनिरीक्षण श्लोक 1 . 3पश्यैतां �

अध्याय 1 श्लोक 1 - 2 - Bhagavad Gita In Hindi

Filed under: Bhagvad Gita
अध्याय 1 श्लोक 2संजय ने कहा - हे राजन! पाण्डुपुत्रों द्वारा सेना की व्यूहरचना देखकर राजा दुर्योधन अपने गुरु के पास गया और उसने ये शब्द कहे । अध्याय 1: कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में सैन्यनिरीक्षण श्लोक 1 . 2सञ्जय उवाचदृष्ट्वा तु पाण

अध्याय 1 श्लोक 1 - Bhagavad Gita In Hindi

Filed under: Bhagvad Gita
अध्याय 1 श्लोक 1धृतराष्ट्र ने कहा -- हे संजय! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में युद्ध की इच्छा से एकत्र हुए मेरे तथा पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया ?अध्याय 1: कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में सैन्यनिरीक्षण श्लोक 1 . 1धृतराष्ट्र उवाचधर्मक्षेत्र�

उत्तर काण्ड दोहा 07

Filed under: Uttar Kand
चौपाई :सासुन्ह सबनि मिली बैदेही । चरनन्हि लाग हरषु अति तेही॥देहिं असीस बूझि कुसलाता। होइ अचल तुम्हार अहिवाता॥1॥ भावार्थ:- जानकीजी सब सासुओं से मिलीं और उनके चरणों में लगकर उन्हें अत्यंत हर्ष हुआ। सासुएँ कुशल पूछकर आशीष दे रही ह

उत्तर काण्ड दोहा 06

Filed under: Uttar Kand
चौपाई :भरतानुज लछिमन पुनि भेंटे। दुसह बिरह संभव दुख मेटे॥सीता चरन भरत सिरु नावा। अनुज समेत परम सुख पावा॥1॥ भावार्थ:- फिर लक्ष्मणजी शत्रुघ्नजी से गले लगकर मिले और इस प्रकार विरह से उत्पन्न दुःसह दुःख का नाश किया। फिर भाई शत्रुघ्�

उत्तर काण्ड दोहा 05

Filed under: Uttar Kand
चौपाई :आए भरत संग सब लोगा। कृस तन श्रीरघुबीर बियोगा॥बामदेव बसिष्ट मुनिनायक। देखे प्रभु महि धरि धनु सायक॥1॥ भावार्थ:- भरतजी के साथ सब लोग आए। श्री रघुवीर के वियोग से सबके शरीर दुबले हो रहे हैं। प्रभु ने वामदेव, वशिष्ठ आदि मुनिश्रे

उत्तर काण्ड दोहा 04

Filed under: Uttar Kand
चौपाई :इहाँ भानुकुल कमल दिवाकर। कपिन्ह देखावत नगर मनोहर॥सुनु कपीस अंगद लंकेसा। पावन पुरी रुचिर यह देसा॥1॥ भावार्थ:- यहाँ (विमान पर से) सूर्य कुल रूपी कमल को प्रफुल्लित करने वाले सूर्य श्री रामजी वानरों को मनोहर नगर दिखला रहे हैं�