बालकांड दोहा 307
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चौपाई :निज निज बास बिलोकि बराती। सुर सुख सकल सुलभ सब भाँती॥बिभव भेद कछु कोउ न जाना। सकल जनक कर करहिं बखाना॥1॥ भावार्थ:- बारातियों ने अपने-अपने ठहरने के स्थान देखे तो वहाँ देवताओं के सब सुखों को सब प्रकार से सुलभ पाया। इस ऐश्वर्य का