बालकांड दोहा 299
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चौपाई :बाँधें बिरद बीर रन गाढ़े। निकसि भए पुर बाहेर ठाढ़े॥फेरहिं चतुर तुरग गति नाना। हरषहिं सुनि सुनि पनव निसाना॥1॥ भावार्थ:- शूरता का बाना धारण किए हुए रणधीर वीर सब निकलकर नगर के बाहर आ खड़े हुए। वे चतुर अपने घोड़ों को तरह-तरह की चालो