अयोध्याकाण्ड दोहा 137
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चौपाई :रामहि केवल प्रेमु पिआरा। जानि लेउ जो जान निहारा॥राम सकल बनचर तब तोषे। कहि मृदु बचन प्रेम परिपोषे॥1॥ भावार्थ:- श्री रामचन्द्रजी को केवल प्रेम प्यारा है, जो जानने वाला हो (जानना चाहता हो), वह जान ले। तब श्री रामचन्द्रजी ने प्र