अयोध्याकाण्ड दोहा 121
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चौपाई :नारि सनेह बिकल बस होहीं। चकईं साँझ समय जनु सोहीं॥मृदु पद कमल कठिन मगु जानी। गहबरि हृदयँ कहहिं बर बानी॥1॥ भावार्थ:- स्त्रियाँ स्नेहवश विकल हो जाती हैं। मानो संध्या के समय चकवी (भावी वियोग की पीड़ा से) सोह रही हो। (दुःखी हो रही