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अयोध्याकाण्ड दोहा 193

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चौपाई :लखब सनेहु सुभायँ सुहाएँ। बैरु प्रीति नहिं दुरइँ दुराएँ॥अस कहि भेंट सँजोवन लागे। कंद मूल फल खग मृग मागे॥1॥ भावार्थ:- उनके सुंदर स्वभाव से मैं उनके स्नेह को पहचान लूँगा। वैर और प्रेम छिपाने से नहीं छिपते। ऐसा कहकर वह भेंट का

अयोध्याकाण्ड दोहा 192

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चौपाई :राम प्रताप नाथ बल तोरे। करहिं कटकु बिनु भट बिनु घोरे॥जीवन पाउ न पाछें धरहीं। रुंड मुंडमय मेदिनि करहीं॥1॥ भावार्थ:- हे नाथ! श्री रामचन्द्रजी के प्रताप से और आपके बल से हम लोग भरत की सेना को बिना वीर और बिना घोड़े की कर देंगे (एक

अयोध्याकाण्ड दोहा 191

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चौपाई :बेगहु भाइहु सजहु सँजोऊ। सुनि रजाइ कदराइ न कोऊ॥भलेहिं नाथ सब कहहिं सहरषा। एकहिं एक बढ़ावइ करषा॥1॥ भावार्थ:- (उसने कहा-) हे भाइयों! जल्दी करो और सब सामान सजाओ। मेरी आज्ञा सुनकर कोई मन में कायरता न लावे। सब हर्ष के साथ बोल उठे- हे 

अयोध्याकाण्ड दोहा 190

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चौपाई :होहु सँजोइल रोकहु घाटा। ठाटहु सकल मरै के ठाटा॥सनमुख लोह भरत सन लेऊँ। जिअत न सुरसरि उतरन देऊँ॥1॥ भावार्थ:- सुसज्जित होकर घाटों को रोक लो और सब लोग मरने के साज सजा लो (अर्थात भरत से युद्ध में लड़कर मरने के लिए तैयार हो जाओ)। मैं 

अयोध्याकाण्ड दोहा 189

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चौपाई :सई तीर बसि चले बिहाने। सृंगबेरपुर सब निअराने॥समाचार सब सुने निषादा। हृदयँ बिचार करइ सबिषादा॥1॥ भावार्थ:- रात भर सई नदी के तीर पर निवास करके सबेरे वहाँ से चल दिए और सब श्रृंगवेरपुर के समीप जा पहुँचे। निषादराज ने सब समाचार स

अयोध्याकाण्ड दोहा 188

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चौपाई :राम दरस बस सब नर नारी। जनु करि करिनि चले तकि बारी॥बन सिय रामु समुझि मन माहीं। सानुज भरत पयादेहिं जाहीं॥1॥ भावार्थ:- श्री रामचन्द्रजी के दर्शन के वश में हुए (दर्शन की अनन्य लालसा से) सब नर-नारी ऐसे चले मानो प्यासे हाथी-हथिनी ज

अयोध्याकाण्ड दोहा 187

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चौपाई :चक्क चक्कि जिमि पुर नर नारी। चहत प्रात उर आरत भारी॥जागत सब निसि भयउ बिहाना। भरत बोलाए सचिव सुजाना॥1॥ भावार्थ:- नगर के नर-नारी चकवे-चकवी की भाँति हृदय में अत्यन्त आर्त होकर प्रातःकाल का होना चाहते हैं। सारी रात जागते-जागते 

अयोध्याकाण्ड दोहा 186

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चौपाई :घर घर साजहिं बाहन नाना। हरषु हृदयँ परभात पयाना॥भरत जाइ घर कीन्ह बिचारू। नगरु बाजि गज भवन भँडारू॥1॥ भावार्थ:- घर-घर लोग अनेकों प्रकार की सवारियाँ सजा रहे हैं। हृदय में (बड़ा) हर्ष है कि सबेरे चलना है। भरतजी ने घर जाकर विचार कि