अयोध्याकांड दोहा 177
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चौपाई :मोहि उपदेसु दीन्ह गुरु नीका। प्रजा सचिव संमत सबही का॥मातु उचित धरि आयसु दीन्हा। अवसि सीस धरि चाहउँ कीन्हा॥1॥ भावार्थ:- गुरुजी ने मुझे सुंदर उपदेश दिया। (फिर) प्रजा, मंत्री आदि सभी को यही सम्मत है। माता ने भी उचित समझकर ही आज