अयोध्याकाण्ड दोहा 201
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चौपाई :राम सुना दुखु कान न काऊ। जीवनतरु जिमि जोगवइ राउ॥पलक नयन फनि मनि जेहि भाँती। जोगवहिं जननि सकल दिन राती॥1॥ भावार्थ:- श्री रामचंद्रजी ने कानों से भी कभी दुःख का नाम नहीं सुना। महाराज स्वयं जीवन वृक्ष की तरह उनकी सार-सँभाल किय