अयोध्याकाण्ड दोहा 241
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चौपाई :मिलनि प्रीति किमि जाइ बखानी। कबिकुल अगम करम मन बानी॥परम प्रेम पूरन दोउ भाई। मन बुधि चित अहमिति बिसराई॥1॥ भावार्थ:- मिलन की प्रीति कैसे बखानी जाए? वह तो कविकुल के लिए कर्म, मन, वाणी तीनों से अगम है। दोनों भाई (भरतजी और श्री राम