अयोध्याकाण्ड दोहा 249
Filed under:
Ayodhyakand
चौपाई :राम बचन सुनि सभय समाजू। जनु जलनिधि महुँ बिकल जहाजू॥सुनि गुर गिरा सुमंगल मूला। भयउ मनहुँ मारुत अनुकूला॥1॥ भावार्थ:- श्री रामजी के वचन सुनकर सारा समाज भयभीत हो गया। मानो बीच समुद्र में जहाज डगमगा गया हो, परन्तु जब उन्होंने ग