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अयोध्याकाण्ड दोहा 233

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चौपाई :जौं न होत जग जनम भरत को। सकल धरम धुर धरनि धरत को॥कबि कुल अगम भरत गुन गाथा। को जानइ तुम्ह बिनु रघुनाथा॥1॥ भावार्थ:- यदि जगत्‌ में भरत का जन्म न होता, तो पृथ्वी पर संपूर्ण धर्मों की धुरी को कौन धारण करता? हे रघुनाथजी! कविकुल के लि

अयोध्याकाण्ड दोहा 232

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चौपाई :तिमिरु तरुन तरनिहि मकु गिलई। गगनु मगन मकु मेघहिं मिलई॥गोपद जल बूड़हिं घटजोनी। सहज छमा बरु छाड़ै छोनी॥1॥ भावार्थ:- अन्धकार चाहे तरुण (मध्याह्न के) सूर्य को निगल जाए। आकाश चाहे बादलों में समाकर मिल जाए। गो के खुर इतने जल में अग

अयोध्याकाण्ड दोहा 231

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चौपाई :जगु भय मगन गगन भइ बानी। लखन बाहुबलु बिपुल बखानी॥तात प्रताप प्रभाउ तुम्हारा। को कहि सकइ को जाननिहारा॥1॥ भावार्थ:- सारा जगत्‌ भय में डूब गया। तब लक्ष्मणजी के अपार बाहुबल की प्रशंसा करती हुई आकाशवाणी हुई- हे तात! तुम्हारे प्र

अयोध्याकाण्ड दोहा 230

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चौपाई :उठि कर जोरि रजायसु मागा। मनहुँ बीर रस सोवत जागा॥बाँधि जटा सिर कसि कटि भाथा। साजि सरासनु सायकु हाथा॥1॥ भावार्थ:- यों कहकर लक्ष्मणजी ने उठकर, हाथ जोड़कर आज्ञा माँगी। मानो वीर रस सोते से जाग उठा हो। सिर पर जटा बाँधकर कमर में तरक

अयोध्याकाण्ड दोहा 229

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चौपाई :सहसबाहु सुरनाथु त्रिसंकू। केहि न राजमद दीन्ह कलंकू॥भरत कीन्ह यह उचित उपाऊ। रिपु रिन रंच न राखब काउ॥1॥ भावार्थ:- सहस्रबाहु, देवराज इंद्र और त्रिशंकु आदि किसको राजमद ने कलंक नहीं दिया? भरत ने यह उपाय उचित ही किया है, क्योंकि 

अयोध्याकाण्ड दोहा 228

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चौपाई :बिषई जीव पाइ प्रभुताई। मूढ़ मोह बस होहिं जनाई॥भरतु नीति रत साधु सुजाना। प्रभु पद प्रेमु सकल जगु जाना॥1॥ भावार्थ:- परंतु मूढ़ विषयी जीव प्रभुता पाकर मोहवश अपने असली स्वरूप को प्रकट कर देते हैं। भरत नीतिपरायण, साधु और चतुर हैं

अयोध्याकाण्ड दोहा 227

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चौपाई :बहुरि सोचबस भे सियरवनू। कारन कवन भरत आगवनू॥एक आइ अस कहा बहोरी। सेन संग चतुरंग न थोरी॥1॥ भावार्थ:- सीतापति श्री रामचंद्रजी पुनः सोच के वश हो गए कि भरत के आने का क्या कारण है? फिर एक ने आकर ऐसा कहा कि उनके साथ में बड़ी भारी चतुरं

अयोध्याकाण्ड दोहा 226

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चौपाई :सकल सनेह सिथिल रघुबर कें। गए कोस दुइ दिनकर ढरकें॥जलु थलु देखि बसे निसि बीतें। कीन्ह गवन रघुनाथ पिरीतें॥1॥ भावार्थ:- सब लोग श्री रामचंद्रजी के प्रेम के मारे शिथिल होने के कारण सूर्यास्त होने तक (दिनभर में) दो ही कोस चल पाए और