बालकांड दोहा 211
Filed under:
Balkand
छन्द :परसत पद पावन सोकनसावन प्रगट भई तपपुंज सही।देखत रघुनायक जन सुखदायक सनमुख होइ कर जोरि रही॥अति प्रेम अधीरा पुलक शरीरा मुख नहिं आवइ बचन कही।अतिसय बड़भागी चरनन्हि लागी जुगल नयन जलधार बही॥1॥भावार्थ:- श्री रामजी के पवित्र और शोक क