बालकांड दोहा 179
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चौपाई :रहे तहाँ निसिचर भट भारे। ते सब सुरन्ह समर संघारे॥अब तहँ रहहिं सक्र के प्रेरे। रच्छक कोटि जच्छपति केरे॥1॥भावार्थ:- (पहले) वहाँ बड़े-बड़े योद्धा राक्षस रहते थे। देवताओं ने उन सबको युद्द में मार डाला। अब इंद्र की प्रेरणा से वहाँ क