बालकांड दोहा 203
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चौपाई :बालचरित हरि बहुबिधि कीन्हा। अति अनंद दासन्ह कहँ दीन्हा॥कछुक काल बीतें सब भाई। बड़े भए परिजन सुखदाई॥1॥भावार्थ:- भगवान ने बहुत प्रकार से बाललीलाएँ कीं और अपने सेवकों को अत्यन्त आनंद दिया। कुछ समय बीतने पर चारों भाई बड़े होकर क