बालकांड दोहा 251
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चौपाई :भूप सहस दस एकहि बारा। लगे उठावन टरइ न टारा॥डगइ न संभु सरासनु कैसें। कामी बचन सती मनु जैसें॥1॥भावार्थ:- तब दस हजार राजा एक ही बार धनुष को उठाने लगे, तो भी वह उनके टाले नहीं टलता। शिवजी का वह धनुष कैसे नहीं डिगता था, जैसे कामी पुरु