बालकांड दोहा 267
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चौपाई :बैनतेय बलि जिमि चह कागू। जिमि ससु चहै नाग अरि भागू॥जिमि चह कुसल अकारन कोही। सब संपदा चहै सिवद्रोही॥1॥ भावार्थ:- जैसे गरुड़ का भाग कौआ चाहे, सिंह का भाग खरगोश चाहे, बिना कारण ही क्रोध करने वाला अपनी कुशल चाहे, शिवजी से विरोध करन