बालकांड दोहा 331
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चौपाई :दंड प्रनाम सबहि नृप कीन्हे। पूजि सप्रेम बरासन दीन्हे॥चारि लच्छ बर धेनु मगाईं। काम सुरभि सम सील सुहाईं॥1॥ भावार्थ:- राजा ने सबको दण्डवत् प्रणाम किया और प्रेम सहित पूजन करके उन्हें उत्तम आसन दिए। चार लाख उत्तम गायें मँगवा