बालकांड दोहा 339
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चौपाई :बहुबिधि भूप सुता समुझाईं। नारिधरमु कुलरीति सिखाईं॥दासीं दास दिए बहुतेरे। सुचि सेवक जे प्रिय सिय केरे॥1॥ भावार्थ:- राजा ने पुत्रियों को बहुत प्रकार से समझाया और उन्हें स्त्रियों का धर्म और कुल की रीति सिखाई। बहुत से दासी-