अयोध्याकाण्ड दोहा 89
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चौपाई :राम लखन सिय रूप निहारी। कहहिं सप्रेम ग्राम नर नारी॥ते पितु मातु कहहु सखि कैसे। जिन्ह पठए बन बालक ऐसे॥1॥ भावार्थ:- श्री रामजी, लक्ष्मणजी और सीताजी के रूप को देखकर गाँव के स्त्री-पुरुष प्रेम के साथ चर्चा करते हैं। (कोई कहती है