अयोध्याकाण्ड दोहा 97
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चौपाई :बिनती भूप कीन्ह जेहि भाँती। आरति प्रीति न सो कहि जाती॥पितु सँदेसु सुनि कृपानिधाना। सियहि दीन्ह सिख कोटि बिधाना॥1॥ भावार्थ:- राजा ने जिस तरह (जिस दीनता और प्रेम से) विनती की है, वह दीनता और प्रेम कहा नहीं जा सकता। कृपानिधान श