अयोध्याकाण्ड दोहा 81
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चौपाई :एहि बिधि राम सबहि समुझावा। गुर पद पदुम हरषि सिरु नावा॥गनपति गौरि गिरीसु मनाई। चले असीस पाइ रघुराई॥1॥ भावार्थ:- इस प्रकार श्री रामजी ने सबको समझाया और हर्षित होकर गुरुजी के चरणकमलों में सिर नवाया। फिर गणेशजी, पार्वतीजी और