अयोध्याकांड दोहा 153
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चौपाई :तेहि अवसर रघुबर रुख पाई। केवट पारहि नाव चलाई॥रघुकुलतिलक चले एहि भाँती। देखउँ ठाढ़ कुलिस धरि छाती॥1॥ भावार्थ:- उसी समय श्री रामचन्द्रजी का रुख पाकर केवट ने पार जाने के लिए नाव चला दी। इस प्रकार रघुवंश तिलक श्री रामचन्द्रजी