अयोध्याकाण्ड दोहा 273
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चौपाई :गरइ गलानि कुटिल कैकेई। काहि कहै केहि दूषनु देई॥अस मन आनि मुदित नर नारी। भयउ बहोरि रहब दिन चारी॥1॥ भावार्थ:- कुटिल कैकेयी मन ही मन ग्लानि (पश्चाताप) से गली जाती है। किससे कहे और किसको दोष दे? और सब नर-नारी मन में ऐसा विचार कर प्