अयोध्याकाण्ड दोहा 298
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चौपाई :प्रभु पितु मातु सुहृद गुर स्वामी। पूज्य परम हित अंतरजामी॥सरल सुसाहिबु सील निधानू। प्रनतपाल सर्बग्य सुजानू॥1॥ भावार्थ:- हे प्रभु! आप पिता, माता, सुहृद् (मित्र), गुरु, स्वामी, पूज्य, परम हितैषी और अन्तर्यामी हैं। सरल हृदय, श्र