अयोध्याकाण्ड दोहा 314
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चौपाई :पुरजन परिजन प्रजा गोसाईं। सब सुचि सरस सनेहँ सगाईं॥राउर बदि भल भव दुख दाहू। प्रभु बिनु बादि परम पद लाहू॥1॥ भावार्थ:- हे गोसाईं! आपके प्रेम और संबंध में अवधपुर वासी, कुटुम्बी और प्रजा सभी पवित्र और रस (आनंद) से युक्त हैं। आपके