अरण्यकाण्ड दोहा 11
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चौपाई :कह मुनि प्रभु सुनु बिनती मोरी। अस्तुति करौं कवन बिधि तोरी॥महिमा अमित मोरि मति थोरी। रबि सन्मुख खद्योत अँजोरी॥1॥ भावार्थ:- मुनि कहने लगे- हे प्रभो! मेरी विनती सुनिए। मैं किस प्रकार से आपकी स्तुति करूँ? आपकी महिमा अपार है और