बालकांड दोहा 51
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चौपाई :बिष्नु जो सुर हित नरतनु धारी। सोउ सर्बग्य जथा त्रिपुरारी॥खोजइ सो कि अग्य इव नारी। ग्यानधाम श्रीपति असुरारी॥1॥भावार्थ:- देवताओं के हित के लिए मनुष्य शरीर धारण करने वाले जो विष्णु भगवान् हैं, वे भी शिवजी की ही भाँति सर्वज्ञ