बालकांड दोहा 123
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चौपाई :मुकुत न भए हते भगवाना। तीनि जनम द्विज बचन प्रवाना॥एक बार तिन्ह के हित लागी। धरेउ सरीर भगत अनुरागी॥1॥भावार्थ:- भगवान के द्वारा मारे जाने पर भी वे (हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु) इसीलिए मुक्त नहीं हुए कि ब्राह्मण के वचन (शाप) का प्