बालकांड दोहा 147
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चौपाई :सरद मयंक बदन छबि सींवा। चारु कपोल चिबुक दर ग्रीवा॥अधर अरुन रद सुंदर नासा। बिधु कर निकर बिनिंदक हासा॥1॥भावार्थ:- उनका मुख शरद (पूर्णिमा) के चन्द्रमा के समान छबि की सीमास्वरूप था। गाल और ठोड़ी बहुत सुंदर थे, गला शंख के समान (त्रि