बालकांड दोहा 75
Filed under:
Balkand
चौपाई :अस तपु काहुँ न कीन्ह भवानी। भए अनेक धीर मुनि ग्यानी॥अब उर धरहु ब्रह्म बर बानी। सत्य सदा संतत सुचि जानी॥1॥भावार्थ:- हे भवानी! धीर, मुनि और ज्ञानी बहुत हुए हैं, पर ऐसा (कठोर) तप किसी ने नहीं किया। अब तू इस श्रेष्ठ ब्रह्मा की वाणी क