अयोध्याकांड दोहा 25
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चौपाई :कोपभवन सुनि सकुचेउ राऊ। भय बस अगहुड़ परइ न पाऊ॥सुरपति बसइ बाहँबल जाकें। नरपति सकल रहहिं रुख ताकें॥1॥ भावार्थ:- कोप भवन का नाम सुनकर राजा सहम गए। डर के मारे उनका पाँव आगे को नहीं पड़ता। स्वयं देवराज इन्द्र जिनकी भुजाओं के बल प