बालकाण्ड दोहा 11
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चौपाई :मनि मानिक मुकुता छबि जैसी। अहि गिरि गज सिर सोह न तैसी॥नृप किरीट तरुनी तनु पाई। लहहिं सकल सोभा अधिकाई॥1॥ भावार्थ:- मणि, माणिक और मोती की जैसी सुंदर छबि है, वह साँप, पर्वत और हाथी के मस्तक पर वैसी शोभा नहीं पाती। राजा के मुकुट और