बालकाण्ड दोहा 03
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चौपाई :मज्जन फल पेखिअ ततकाला। काक होहिं पिक बकउ मराला॥सुनि आचरज करै जनि कोई। सतसंगति महिमा नहिं गोई॥1॥ भावार्थ:- इस तीर्थराज में स्नान का फल तत्काल ऐसा देखने में आता है कि कौए कोयल बन जाते हैं और बगुले हंस। यह सुनकर कोई आश्चर्य न कर